Tag: बैरिया
रेवती थाना क्षेत्र के रेवती-पचरूखिया मार्ग पर चौबेछपरा सरकारी ट्यूबवेल के समीप मक्के खेत में शनिवार की सुबह एक युवती की गला रेत कर हत्या की हुई लाश मिली. सुबह-सुबह रामाराय वर्मा के मक्के खेत में कुछ ग्रामीणों ने एक युवती की लाश देखते ही खुसर फुसर करना शुरू कर दिया. किसी ग्रामीण ने इसकी सूचना पुलिस को 100 नंबर पर दी. सूचना मिलते ही सीओ बैरिया त्रयंबक नाथ दुबे व थानाध्यक्ष रेवती मौके पर पहुंच गए.
महात्मा गांधी इण्टर कॉलेज दलनछपरा के प्रबंधक बब्बन सिंह रघुबंशी व प्रधान लिपिक श्रवण कुमार सिंह के खिलाफ दोकटी पुलिस ने आईपीसी की धारा 419, 420, 467 व 468 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है. इन पर कॉलेज का कार्यवाही रजिस्टर अपने पास रखना तथा कूटरचित तरीके से हेरा-फेरी कर सरकारी सम्पत्ति का उपयोग निजी कार्य में प्रयोग करने का आरोप है
मनरेगा योजनान्तर्गत मजदूरों से कार्य कराकर उनके भुगतान के नाम पर ग्राम प्रधानों को मजदूरों से नजर बचा कर चलना पड़ रहा है. वजह 11 जुलाई के बाद से मनरेगा मजदूरों के खाते में उनके मजदूरी का पैसा आया ही नहीं है. जबकि इस बीच के दौरान जन्माष्टमी, रक्षाबन्धन, अनन्त चतुर्दशी, जिउतिया, तीज, नवरात्रि, दशहरा जैसे पर्व आए, जिनमें आम परिवारों का खर्च बढ़ जाता है.
बैरिया ब्लाक मुख्यालय पर 14वें दिन भी रोजगार सेवकों का आन्दोलन जारी रहा. उनके समर्थन में जिले भर के रोजगार सेवक संगठन के पदाधिकारी बैरिया पहुंच कर उनके साथ धरना पर बैठे. यहां के रोजगार सेवकों का मानदेय विगत 18 माह से लम्बित पड़ा है. इस मांग को लेकर 14 दिन से रोजगार सेवक ब्लाक के कार्यालय पर ताला बन्द कर दरी बिछाकर धरना पर सुबह से शाम तक बैठ रहे हैं.
विजयादशमी की मंगलवार को जिले भर में धूम रही. बैरिया में जहां आरएसएस का स्थापना दिवस मनाया गया, वहीं खरौनी में रावण का पुतला फूंका गया. नगवा गांव में चित्रसेन बाबा के स्थान पर बीते दिनों से चल रहे मानस पाठ एवं सत्संग का मंगलवार को समापन हुआ. दशहरा के अवसर पर जिले के विभिन्न इलाकों में लोगों ने रावण के पुतले का दहन किया. त्योहार के मद्देनजर जिले में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे.
लालू प्रसाद यादव ने पड़ोसी बिहार की सड़कों की चर्चा करते हुए हेमामालिनी के गाल का हवाला दिया था. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 2 मई को बैरिया आगमन पर आने पर श्रृंगार पटार करके कुछ इसी अंदाज में शहीद स्मारक मार्ग तैयार किया गया था. मगर आज कुछ महीने बाद ही उसकी हालत बस पूछिए मत, तस्वीरों में खुद ही देखिए.
कई मायने में पूरे हिंदुस्तान के लिए नजीर है रानीगंज बाजार का दुर्गोत्सव. ठीक आजादी के साल हुई थी इसकी शुरुआत. यहां हिंदुओं ने दुर्गात्सव और मुसलमानों ने ताजिया रखकर मुहर्रम मनाने की शुरुआत ठीक उसी जगह साथ साथ की थी. और बीते 70 सालों से यह परम्परा जस की तस चली आ रही है. कई बार ऐसे मौके आए जब दोनों त्योहार साथ साथ पड़े. उसका भी समाधान यहां लोगों ने चुटकी में ढूंढ लिया.
