Category: अध्यात्म
व्रत करने वाले जल में खड़े होकर डालों को उठाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, सूर्यास्त के पश्चात व्रती पूरी रात साधना करते हैं , कुछ घर भी वापस आ जाते हैं ,रात्रि जागरण होता है , सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पुन: बाँस के डालों में पकवान, नारियल, केला, मिठाई लेकर नदी तट पर व्रती सपरिवार जाते हैं , जहाँ उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं.
कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु भक्तों ने हनुमानगढ़ी मंदिर से जल कलश में भरकर मुख्य बाजार,थाना चौराहा,गोविंदपुर होते हुए यज्ञ स्थल पर पहुंचे. यात्रा में शामिल पुरुष, महिलाएं, बालक, बालिकाएं सिर पर जल से भरा हुआ कलश लेकर ॐ नमः शिवाय व बाबा के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.
4 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक होने वाले श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ की कलश यात्रा की तैयारी के लिए यज्ञ समिति और जिला प्रशासन ने पूरी तरह से तैयारी कर ली है. जहां यज्ञ समिति ने अनेक युवाओं को जिम्मेदारी कमेटी बनाकर सौंप रखी है वहीं जिला प्रशासन ने जगह-जगह बैरिकेडिंग कर बड़े वाहनों को यज्ञ स्थल पर प्रवेश वर्जित कर दिया है तथा इसके लिए जनपद के अन्य थानों से पुलिस प्रशासन के लोग भारी संख्या में यज्ञ स्थल पर पहुंचे हैं जो कलश यात्रा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे.
श्री जीयर स्वामी ने श्रीमद भागवत महापुराण कथा के तहत प्रहलाद जी द्वारा प्रजा को दिए गए उपदेश की चर्चा की. उन्होंने कहा कि भगवान पक्षपात नहीं करते. वे निष्पक्ष हैं. जिसमे पक्षपात आ जाये, वह भगवान नहीं देवता हो सकता है. जब राक्षस साधना द्वारा बल प्राप्त करके देवाताओं पर अत्याचार करते हैं, तब भगवान राक्षसों का दमन करते हैं.
. 4 अक्टूबर को कलश जल यात्रा आयोजित है. जिसका रूट महायज्ञ आयोजन समिति तथा प्रशासन की बैठक में निर्धारित कर आमजन के सूचनार्थ सार्वजनिक कर दिया गया है. श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में अपनी सहभागिता दर्ज कराने काफी संख्या में प्रसिद्ध साधु-संत, महात्मा, कथावाचक, श्रद्धालु एवं भक्तगण झारखंड, बिहार सहित भारत के अन्य राज्यों से आना शुरु कर दिया है. बाहर से आने वाले संत-महात्माओं, आचार्यों एवं अतिथियों के लिए आवास, कुटिया एवं भोजन आदि की उत्तम व्यवस्था की गई है.
