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बलिया पशु मेला से एक सप्ताह बाद से शुरू होने वाले सन्त सुदिष्ट बाबा के नाम पर इब्राहिमाबाद मे तीन सप्ताह तक चलने वाले पशु मेला में सन्नाटा पसरा है. यह मेला जिला पंचायत द्वारा लगाया जाता है और जिला पंचायत को इस मेले से अच्छे राजस्व की प्राप्ति होती रही है, लेकिन बड़े नोट बन्दी का असर इस मेला पर पड़ा है. न तो बाहर से अपने पशुओं की खेप लेकर व्यापारी आए और न ही बाहरी खरीदार.
पंचकोशी परिक्रमा सह पंचकोश मेला इस माह की उन्नीस तारीख से प्रारंभ हो रहा है. जिसका शुभारंभ शनिवार को अहिरौली से होगा. विश्व विख्यात बक्सर के इस मेले को लोग लिट्टी-चोखा मेला के नाम से जानते हैं. यह मेला अब बक्सर जिले की पहचान बन चुका है. अन्य प्रदेशों और जिलों में बसे लोग इस तिथि को हर दम याद रखते हैं.
बलिया के ऐतिहासिक ददरी मेला के भारतेंदु कला मंच पर शुक्रवार को आयोजित फाइनल में राहुल यादव ने बलिया केसरी का खिताब जीत लिया. उन्होंने पिछले वर्ष के बलिया केसरी रहे अंचल सिंह को परास्त किया है. नगर पालिका परिषद बलिया के तत्वावधान में आयोजित इस दंगल की शुरुआत बैरिया विधायक जयप्रकाश अंचल ने बजरंगबली के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद फीता काटकर किया.
उपायुक्त उद्योग ने जनपद के हस्तशिल्पियों से कहा है कि मेला/प्रदर्शनी में भाग लेने पर यातायात, माल ढुलाई व्यय एवं स्टाल पर किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति के रूप में दस हजार तक की धनराशि सहयोग/प्रतिपूर्ति के रूप में प्रति हस्तशिल्पी को प्रदान की जाएगी. उन्होने कहा कि हस्तशिल्पी अपना आवेदन पत्र पहचान पत्र के साथ जिला उद्योग कार्यालय में जमा कर दें.
ददरी मेले में मीना बाजार लगाने को लेकर हंगामा हुआ. मंगलवार को कानपुर और बिहार के दुकानदार परेशान हुए. स्थानीय लोगों की माने तो इतिहास में शायद पहली बार ऐसी घटना हुई है. ददरी मेले में दुकानदारों को जगह नहीं मिली. दबंगों ने दुकानदारों की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया. मेले में दुकानदार दिन भर सामान बाहर रखे. ददरी मेले में दुकानदारों को धमकी मिली है.
आज का कार्तिक पूर्णिमा का सृष्टि के आरंभ से ही इस तिथि का खास महत्व रहा है. सिर्फ वैष्णवों और शैवों के लिए ही नहीं, वरन सिखों और जैनियों के लिए भी. अभी आपने देवोत्थानी एकादशी मनाई थी. उस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागे थे. कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन उन्होंने पालनकर्ता के रूप में अपनी पूरी जिम्मेदारी उठा ली थी.
कार्तिक पूर्णिमा का पवित्र स्नान रविवार और सोमवार की दरम्यानी आधी रात प्रारंभ हो गया. भृगु बाबा के जयकारे के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया. इसके बाद सीधे जिला मुख्यालय स्थित भृगु आश्रम पहुंचे और धूप दीप नैवेद्य के साथ जलाभिषेक किया. बाबा की आरती के लिए भारी संख्या में महिलाएं मंदिर पर मौजूद रहीं. इस मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे.
