मूर्धन्य हिंदी साहित्यकार केदारनाथ सिंह जी का जाना सिर्फ हिन्दी साहित्य की नहीं, बल्कि दुनिया की सैकड़ों भाषाओं पर वज्रपात गिरने जैसा है. अपने समय के श्रेष्ठ कवि केदार नाथ सिंह के निधन से पूरा साहित्य जगत सकते में है
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