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अपने देश में तीन स्थानों पर स्नान और मेला एक ही समय कार्तिक पूर्णिमा के दिन दिन शुरू होता है. वह है बिहार का सोनपुर, बलिया का ददरी मेला और छपरा (बिहार) का ही कोनिया मेला. आप सोनपुर और ददरी मेला के विषय में तो बहुत कुछ जानते होंगे, किंतु छपरा जिला मुख्यालय से महज दस किमी की दूरी पर स्थित पैराणिक गोदना, वर्तमान में रिविलगंज, के विषय में कम जानते होंगे.
कार्तिक पूर्णिमा के सांथ-सांथ बाल दिवस पर भी आप खूब इन्ज्वाय किए होंगे. इसलिए हम भी चर्चा की शुरूआत बच्चों से ही करें. जगजाहिर है कि अभी के समय में हर अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य बनाने की चिंता में डूबा है. यह सही भी है कि बच्चे हमारे भविष्य, हमारी उम्मीदें और सपनों को साकार करने वाले हैं.
उपायुक्त उद्योग ने जनपद के हस्तशिल्पियों से कहा है कि मेला/प्रदर्शनी में भाग लेने पर यातायात, माल ढुलाई व्यय एवं स्टाल पर किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति के रूप में दस हजार तक की धनराशि सहयोग/प्रतिपूर्ति के रूप में प्रति हस्तशिल्पी को प्रदान की जाएगी. उन्होने कहा कि हस्तशिल्पी अपना आवेदन पत्र पहचान पत्र के साथ जिला उद्योग कार्यालय में जमा कर दें.
बैंकों में एक दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को एक बार फिर पैसा जमा करने पैसा निकालने एवम पैसा बदलने के लिये बैंकों पर देर शाम तक ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही. बैंकों में देर शाम तक लंबी लाइन लगाने के बाद भी पैसा न मिलने से निराश लोग सरकार को खरी खोटी सुनाते हुए अपने घर गए. कुछ बैंकों ने पैसा देना शुरू भी किया तो कुछ ही देर में पैसा की कमी बताकर कर हाथ खड़े कर दिए.
ददरी मेले में मीना बाजार लगाने को लेकर हंगामा हुआ. मंगलवार को कानपुर और बिहार के दुकानदार परेशान हुए. स्थानीय लोगों की माने तो इतिहास में शायद पहली बार ऐसी घटना हुई है. ददरी मेले में दुकानदारों को जगह नहीं मिली. दबंगों ने दुकानदारों की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया. मेले में दुकानदार दिन भर सामान बाहर रखे. ददरी मेले में दुकानदारों को धमकी मिली है.
कार्तिक पूर्णिमा के दिन भृगु की तपोभूमि पर स्नान का काफी महत्व होता हैं. गंगा और तमसा के इस पावन संगम पर सोमवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालुओ ने गंगा में डुबकी लगाई. बांसडीह क्षेत्र से भारी संख्या में श्रध्दालु भी इस पावन स्थल पर स्नान करने के लिए देर शाम से बसों व अन्य साधन से बलिया के लिए रवाना हुए
