12 अगस्त 1942, जब छात्रों ने किया क्रांति का शंखनाद

1942 का आंदोलन बलिया में उग्र होता जा रहा था. अंग्रेजों का जुल्म भी बढ़ता जा रहा था. आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने जिला अधिकारी एवं पुलिस कप्तान को व्यापक अधिकार दे रखे थे.

अब भी बलिया के युवकों में बयालीस का खून उबलता है

महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो नारे का प्रभाव बलिया में बढ़ता जा रहा था, न केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, बल्कि विद्यार्थी एवं महिलाएं भी इस आंदोलन में कूद पड़ी थी.

रसड़ा के सेंट जेवियर्स का छात्र लापता, अब तक कोई सुराग नहीं

  Breaking News | सेंट जेवियर्स रसड़ा का छात्र लापता – पूरी खबर यहां पढ़ें. News Update |  टेंगरही सहकारी समिति के गार्ड का हत्यारा सगा भाई निकला – पूरी खबर यहां पढ़ें. News Update …

चाय लेंगे या पानी?

आजकल सरकार की ओर से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ‘, ‘पानी बचाओ-धरती बचाओ‘ आदि मुहिम चलायी जा रही हैं। चलिये,इस कदम से किसी मुहिम को तो बल मिलेगा। अगर अधिसूचना जारी कर दी जाये कि “ अतिथि,पानी साथ लाओगे“ तो आश्चर्य नहीं।

श्रीकृष्ण रास लीला

गुरू पूर्णिमा (गुरु नानक जयंती) का दिन था। हमारे रिश्तेदारों ने एक बार से अधिक ही कहा था उस दिन हम सपरिवार राजापुर पहुंचें। राजापुर बिहार के बांका जिले का एक भरा-पूरा गांव है। …