Ballia-बांसडीह तहसीलदार बोले- गोंड जाति के पूर्व में जारी जाति प्रमाणपत्रों की पहले जांच होगी फिर नए जारी होंगे

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रविशंकर पांडेय, बांसडीह,बलिया

बांसडीह,बलिया. गोंड जाति के जाति प्रमाण पत्र को लेकर तहसील पर हुए अनशन के बाद प्रशासन हरकत में आया। अनशन के उपरांत तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने गोंड समाज के लोगों को अपने कार्यालय कक्ष में बुलाया, जहां प्रेस की मौजूदगी में देर तक चली वार्ता के दौरान पूरे मामले की स्थिति विस्तार से स्पष्ट की गई।

तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने बताया कि दो दिन पहले भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष मूनजी गोंड अपने समाज के लोगों के साथ तहसील पहुंचे थे। उन्होंने ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी थी कि यदि दो दिनों के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए तो आमरण अनशन किया जाएगा। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को देर शाम अनशन के बाद सभी पक्षों को बुलाकर बातचीत की गई, ताकि तथ्य सामने आ सकें और भ्रम की स्थिति दूर हो।

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वार्ता के दौरान तहसीलदार ने बताया कि प्रशासन ने पूर्व में जारी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर सूची मांगी थी, जिस पर 11 लोगों की सूची दी गई। जांच के दौरान चार मामलों की प्रारंभिक पड़ताल की गई, जिसमें गंभीर विरोधाभास सामने आए। एक ही परिवार में कहीं भड़भूजा जाति का प्रमाण पत्र जारी पाया गया, जबकि उसी परिवार के अन्य सदस्यों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र मिला हुआ है। कुछ लोग इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी में भी कार्यरत हैं।

तहसीलदार ने साफ शब्दों में कहा कि जिन मामलों में इस प्रकार की अनियमितता पाई गई है, उनके संबंधित विभागों को पत्राचार किया जाएगा। आगे जांच में यदि ऐसे और मामले सामने आते हैं तो नौकरी निरस्तीकरण की संस्तुति भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी।

उन्होंने बताया कि शेष आठ मामलों की जांच जारी है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि उनके परिवार में पूर्व में अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी हुआ है और भड़भूजा जाति का कोई प्रमाण पत्र नहीं है, तो उन्हें गोंड जाति का प्रमाण पत्र नियमानुसार जारी किया जाएगा। तहसीलदार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2013 से पहले जाति प्रमाण पत्र ऑफलाइन जारी होते थे, जबकि बाद में ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई। मेरी तहसील सबसे पुरानी तहसील  वर्ष 1945 की है। पुराने रजिस्टर उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर गहन जांच की जा रही है।

वार्ता के दौरान मथौली गांव का उदाहरण भी सामने आया, जहां रोहित नामक व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी है, जबकि उसके पिता नथुनी का प्रमाण पत्र भड़भूजा जाति में बना हुआ है। तहसीलदार ने ऐसे मामलों को संदिग्ध बताते हुए कहा कि जब तक विरोधाभास स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक संबंधित परिवार को कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा।

तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने दो टूक कहा कि उनके कार्यकाल में अब तक एक भी नया गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। पूर्व में जारी सभी प्रमाण पत्रों की भी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जांच से संबंधित पूरी सूची कार्यालय के बाहर चस्पा कर दी गई है।

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