रंग लाई सूर्यभान सिंह की पाती, संवर सकती है लोकनायक की थाती

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के गांव जयप्रकाश नगर ग्राम पंचायत कोडरहा नौबरार के समाजसेवी सूर्यभान सिंह द्वारा बीते तीन अगस्त को मुख्यमंत्री व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को गांव की समस्याओं को लेकर आठ बिंदुओं वाला पत्र लिखा गया था, जिसके जवाब में पत्र आयुक्त आजमगढ़ मंडल व जिलाधिकारी से होते हुए बैरिया उप जिलाधिकारी तक आया और उस पर जांच में तेजी आ गई है.

कामयाबी का श्रेय मम्मी-पापा को, आदर्श अखिलेश यादव

सैदपुर विधान सभा क्षेत्र के लोकप्रिय सपा विधायक सुभाष पासी के छोटे पुत्र राहुल पासी ने स्विटजरलैंड के लेस रोचेस इंटरनेशनल स्कूल्स ऑफ होटल मैनेजमेंट से होटल मैनेजमेंट की बैचलर डिग्री हासिल की है. स्कूल के दीक्षांत समारोह में चांसलर कार्लोस डियाज डे ला लास्त्रा ने उन्हें यह डिग्री सौंपी.

खरीद-दरौली के बीच पक्का पुल, रिजवी समर्थकों की बांछें खिलीं

सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के खरीद दरौली (बिहार) घाटों के मध्य घाघरा नदी पर पक्के पुल के निर्माण की स्वीकृति से इलाकाई लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है. लोग एक दूसरे को बधाई तो दे ही रहे हैं, इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व पशुधन मंत्री मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी को आभार संदेश भेजने की होड़ लगी है.

नोटबंदी के खिलाफ अखिलेश व ममता की ‘युगलबंदी’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी मंगलवार को नोटबंदी के खिलाफ लखनऊ के 1090 चौराहे पर गरजीं. अखिलेश समर्थक भी इस रैली में जुटे. रैली स्थल पर अरविंद गोप और रविदास मेहरोत्रा पहुंच चुके हैं.

मुख्यमंत्री आए तो ‘हेमामालिनी के गाल’, नाही त खस्ताहाल

लालू प्रसाद यादव ने पड़ोसी बिहार की सड़कों की चर्चा करते हुए हेमामालिनी के गाल का हवाला दिया था. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 2 मई को बैरिया आगमन पर आने पर श्रृंगार पटार करके कुछ इसी अंदाज में शहीद स्मारक मार्ग तैयार किया गया था. मगर आज कुछ महीने बाद ही उसकी हालत बस पूछिए मत, तस्वीरों में खुद ही देखिए.

रोजगार सेवक कैसे कहें दिल से कि अखिलेश यादव फिर से

अपने चुनावी वादों में शिक्षा मित्रों और रोजगार सेवकों के स्थायीकरण को अब तक पूरा न कर पाने के कारण इसके तबके में विरोध का स्वर और तेज होता जा रहा है. सरकार ने जहां आधे से अधिक शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित करके प्रशंसा पाई है, वही शेष बचे शिक्षा मित्रों को समायोजित करने के लिए कसरत करती नज़र आ रही है. लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद अब तक रोजगार सेवकों का समायोजन न कर पाना उसे महंगा पड़ सकता है.