Category: देश दुनिया
भारतेन्दु सत्संग मंच मेला ददरी में चतुर्थ दिवसीय सत्संग के तीसरे दिन पं. विजय नारायण शरण जी ने कहा कि घोर कलियुग में माया रूपी चक्की में पीसने से बचने के लिए एक मात्र कील रूपी हरि के शरण में जाना पड़ेगा, जैसे की कबीर बाबा का दोहा चलती चक्की देखकर दिया कबिरा रोय, दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय, वहीं पर कमाल जी का दोहा मिलता है चलती चक्की देखकर हंसा कमाल उठाय.
मुहम्मदाबाद तहसील अन्तर्गत खरडीहा स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में शुक्रवार को स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर के प्राचार्य डॉ. शशिकान्त राय की माता स्व. कमलावती राय पत्नी स्व. शिव नाथ राय के देहावसान के उपरांत आयोजित त्रयोदशाह ब्रह्मभोज कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दिया.
मोहल्ला बिशुनीपुर स्थित स्व. मुनीर हसन जैदी साहब के इमाम बार गाह से गत वर्षों की तरह 25 सफर को अपरान्ह चेहल्लुम के अवसर पर अंजमुन हाशिमियां के तत्वावधान में जैसे ही तबरूकात बरामद हुए, वैसे ही लोगो की आंखे आंसुओं से भर गईं. लोग शोहदाए कर्बला इमाम हुसैन और उनकी आलव साथियों पर हुए अमानवीय जुल्म की कहानियां सुनकर सीना जनी (मातम) करने लगे.
बाबा भोले भंडारी की नगरी ब्रह्मपुर की एक अलग ही विशिष्टता है.. यहां पर हरेक जगह से लोग आते है और बाबा की पूजा अर्चना करते है. महाशिव रात्रि के समय का नज़ारा अद्भुत होता है. ये मंदिर बक्सर, आरा, बलिया, छपरा और सासाराम मे बहुत ज़्यादा प्रसिद्ध है. वैसे तो बिहार और उत्तर प्रदेश के कोने कोने से श्रद्धालु यहां पर दर्शन करने आते हैं.
नोट बंदी के दो हफ़्तों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ग्रामीण अंचलों के बैंकों द्वारा भुगतान न किये जाने से लोगों की समस्यायें कम होने का नाम नहीं ले रही है. ग्रामीण अंचलों के बैंकों पर दलालों का कब्जा है, ग्राहक प्रतिदिन बैकों का परिक्रमा कर निराश होकर बैंक कर्मियों को खरी खोटी सुनाकर लौट जा रहे है. जबकि सरकार लोगों की समस्याओं के दूर करने के लिए रोज कोई न कोई नया आदेश पारित कर रही है.
बैरिया तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में अंत्योदय राशन कार्ड का वितरण शुरू हो गया है. वितरण का कार्य पूर्ति निरीक्षक बैरिया सूर्यनाथ द्वारा कोटेदारों से कराया जा रहा है. इसमें प्रधानों व ग्राम पंचायत सचिव को किसी तरह की जानकारी नहीं दी जा रही है. इस बात को लेकर ग्राम प्रधानों में जबरदस्त आक्रोश है.
इसे सनातन धर्म की आभा कहें या बक्सर जिला वासियों का संस्कृति से लगाव. बिहार का बक्सर जिला यहां एक दिन बहुत ही खास होता है. इस तिथि को बीस लाख से अधिक लोग एक ही साथ भोजन करते हैं. अगहन कृष्ण पक्ष की इस तिथि को लोग पंचकोश के नाम से जानते हैं. पांच दिनों का मेला जिस दिन समाप्त होता है, उस दिन हर घर में एक ही भोजन बनता है.
