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कई मायने में पूरे हिंदुस्तान के लिए नजीर है रानीगंज बाजार का दुर्गोत्सव. ठीक आजादी के साल हुई थी इसकी शुरुआत. यहां हिंदुओं ने दुर्गात्सव और मुसलमानों ने ताजिया रखकर मुहर्रम मनाने की शुरुआत ठीक उसी जगह साथ साथ की थी. और बीते 70 सालों से यह परम्परा जस की तस चली आ रही है. कई बार ऐसे मौके आए जब दोनों त्योहार साथ साथ पड़े. उसका भी समाधान यहां लोगों ने चुटकी में ढूंढ लिया.
आज संपूर्ण क्रांति आंदोलन के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्य तिथि है. हम एक दिन पूर्व जेपी के पैतृक गांव सिताबदियारा में थे. आज हम बिहार सीमा के अंदर सिताबदियारा के चैन छपरा में स्थित जेपी के उस क्रांति मैदान में भी पहुंचे, जहां 1974 में ही लगभग 10 हजार लोगों ने जेपी के सांथ मिलकर जनेऊ तोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया था.
ब्लाक मुख्यालय पर तीसरे दिन शुक्रवार को भी रोजगार सेवकों ने तालाबन्दी रखा. किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी को कार्यालय में घुसने नहीं दिया. बल्कि आज तो रोजगार सेवकों ने अपने मानदेय का ब्लाक एकाउन्टेन्ट, मनरेगा एकाउन्टेन्ट व सम्बन्धित अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग आठ लाख रुपये की घपलेबाजी का आरोप लगाया.
