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आशीष दूबे, बलिया
बलिया/लखनऊ. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने आज अपना दसवां और दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश कर दिया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 9 लाख 12 हजार 696 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया। उत्तर प्रदेश सरकार का यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इस बजट को सरकार जहां उपलब्धियों भरा बता रही है वहीं विपक्ष को यह पसंद नहीं आया है।
सीएम योगी ने कहा कि हमने राज्य का परसेप्शन बदला है। पॉलिसी पैरालिसिस से बाहर निकाला है, वहीं बजट के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सरकार का विदाई बजट बताया। अखिलेश यादव के बाद समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया।
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पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और अर्थनीति में ‘बजट’ अब केवल एक वित्तीय विवरण नहीं, बल्कि एक भव्य ‘इवेंट’ बन चुका है। जब विधानसभा में भारी-भरकम आंकड़ों का पिटारा खुलता है, तो हेडलाइंस “ऐतिहासिक” और “रिकॉर्ड तोड़” जैसे शब्दों से भर जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन गुलाबी आंकड़ों की चमक उन गड्ढों को भर पा रही है जो प्रदेश की सड़कों पर सालों से अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
चौधरी ने कहा कि सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ बन चुका है। इसमें कोई दो राय नहीं कि बुनियादी ढांचे पर काम हुआ है, लेकिन विज्ञापनों में जिस रफ्तार से विकास दौड़ता नजर आता है, वह अक्सर ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आकर दम तोड़ देता है। बजट का एक बड़ा हिस्सा चमचमाती परियोजनाओं पर खर्च होता है, जबकि आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी आज भी टूटी सड़कों और जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बजट 2026-27 चुनावी लुभावन बजट है जो जमीनी हकीकत से दूर है। यह बजट योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूरा बजट है और 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। कहा कि 10 लाख रोजगार, बेटियों की शादी में 1 लाख रुपये, स्कूटी, टैबलेट जैसी घोषणाएं सिर्फ वोट बैंक साधने के लिए हैं। पिछले 9 सालों में ऐसी हजारों घोषणाएं हुईं, लेकिन ज्यादातर कागजी ही रहीं—नौकरी के नाम पर फर्जी लिस्ट, शादी मदद में भ्रष्टाचार और स्कूटी वितरण में घोटाले की शिकायतें आम हैं।
रामगोविंद चौधरी ने कहा कि सड़क, ब्रिज और एक्सप्रेसवे पर करोड़ों खर्च का दावा है, लेकिन पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, स्कूलों में शिक्षक नहीं। बजट का बड़ा हिस्सा लखनऊ-नोएडा जैसे शहरों पर जाता है—ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली-पानी-शिक्षा की मूलभूत समस्याएं जस की तस हैं।
उधर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुशील कुमार पाण्डेय कान्हजी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत 2026- 2027 का बजट आंकड़ों का मायाजाल है, जिसमें धरातल पर काम करने वाले शिक्षकों के लिए कुछ भी नहीं है। सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली और सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों के सशक्तिकरण की मांग को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जिस बजट में शिक्षक/कर्मचारियों के भविष्य (पुरानी पेंशन) और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए ठोस प्रावधान न हो, उसे हम जनकल्याणकारी नहीं मान सकते। यह बजट केवल प्रचार आधारित है, परिणाम आधारित नहीं है।
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