सुरेमनपुर से अमरशहीद कौशलकुमार के गांव नारायणगढ़ सहित दर्जनों गांवों का इकलौता रास्ता गड्ढों में तब्दील, ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी

बैरिया, बलिया. सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन से अमर शहीद कौशल कुमार के गांव नारायणगढ़ सहित दर्जनभर गांवों को जोड़ने वाला इकलौता मार्ग पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो गया है. यही कोई डेढ-दो दशक पहले इस सड़क का निर्माण हुआ था. उसमें भी ग्राम पंचायत द्वारा लगाए गए खड़ंजा पर ही गिट्टी और तारकोल की परत बिछा दी गई गई थी. जो गिट्टीया और तारकोल बिखर कर कहीं-कहीं खड़ंजा के ईंट उभर आए हैं.

 

इस बीच के समय में ग्रामीणों का आरोप है कि इसके मरम्मत के पैसे सरकार ने स्वीकृत किए, लेकिन सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. कुछ कुछ काम करके मरम्मत के नाम की रस्म अदायगी कर दी गई और आए धन का बंदरबांट कर लिया गया. ऐसा ग्रामीणों का आरोप है.

 

 

ग्रामीणों का तर्क है कि अगर मरम्मत सही ढंग से होती तो कम से कम 6 महीने तो यह सड़क ठीक रहती. सड़क के मौजूदा हालात ऐसे हैं कि कहीं भी 25 मीटर भी सड़क ठीक नहीं है.

 

 

ग्रामीणों ने बताया की धर्मबाग, सुरेमनपुर गांव, दुर्जनपुर, नारायणगढ़, हनुमानगंज, श्रीनगर, दलछपरा,झरकटहां, देवपुर मठिया, हनुमानगंज सहित दर्जनों गांव के लगभग 50 हजार की आबादी का इसी रास्ते आना जाना है. बच्चों का पढ़ने जाना आना, बीमार का अस्पताल जाना, लोगों को बाजार से अपने जरूरत का सामान लाने ले जाने का यही इकलौता मार्ग है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि सन 42 क्रांति के अमर शहीद कौशल कुमार के गांव नारायणगढ़ आने जाने के लिए सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन से यही इकलौता मार्ग है.

 

सड़क से गुजरने वाले लोग यहां की दशा तो भुगत ही रहे हैं. इसी रास्ते के किनारे सुरेमनपुर हनुमान मंदिर पर जुटे ग्रामीणों ने बताया कि कोई ऐसा दिन नहीं जाता जब कोई बच्चा साइकिल से नहीं गिरता. बाइक दुर्घटनाग्रस्त होती हैं. ई-रिक्शा और तिपहिया वाहन तो इस मार्ग पर एक बार गुजर जाए कहीं ना कहीं सड़क पर ही उल्टे दिखाई पड़ जाएंगे.

 

ग्रामीणों ने बताया कि सबसे अधिक दुर्दशा तो तब होती है जब प्रसव के लिए हमें महिलाओं को पीएचसी कोटवा या सीएचसी सोनबरसा ले जाना पड़ता है.

 

ग्रामीणों की शिकायत है जनप्रतिनिधियों से कि वह आते तो इस रास्ते से हैं अमर शहीद कौशल कुमार के नाम पर इतराते भी हैं, पर इस रास्ते को ठीक नहीं कराते. इसके तरफ ध्यान नहीं देते. इसी रास्ते से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का भी आना जाना होता है.

 

बुधवार को इस रास्ते पर जुटे ग्रामीणों ने इस मार्ग को लेकर आंदोलन की मंशा जाहिर की और चेतावनी दी कि अगले 1 महीने के अंदर इस सड़क का जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो आंदोलन की राह पकड़ेंगे.

 

इसके पहले लोगों ने जिलाधिकारी व जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल इस मार्ग के पुनर्निर्माण कर ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है.

इस संदर्भ में सहायक अभियंता लोकनिर्माण विभाग आशीष शुक्ल से जब दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि उक्त मार्ग को सीसी कराने के लिए पिछले साल शासन को प्रस्ताव भेजा गया था किंतु प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया. दुबारा इस साल भी प्रस्ताव भेजा गया है. शासन से अभी तक मंजूरी नही मिली है.

(बैरिया संवाददाता वीरेंद्र मिश्र की रिपोर्ट)

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