बलिया के डॉ अशोक द्विवेदी और अनिल ओझा ‘नीरद’ को मिलेगा साहित्य अकादमी भाषा सम्मान

बलिया. साहित्य अकादमी भाषा सम्मान के लिए भोजपुरी भाषा में उत्कृष्ट लेखन के लिए डॉ अशोक द्विवेदी और अनिल ओझा ‘नीरद’ के नाम की संयुक्त रूप से घोषणा की गई है. “बलिया लाइव” भोजपुरी भाषा के विकास में डॉक्टर अशोक द्विवेदी के योगदान की चर्चा करेगा.

अनिल ओझा 'नीरद'
अनिल ओझा ‘नीरद’

डॉक्टर अशोक द्विवेदी वैसे तो मूल रूप से जनपद गाजीपुर के रहने वाले हैं लेकिन वे बलिया के होकर रह गए हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा और सेवा कार्य का अधिक समय बलिया में ही बीता है. अब वे टैगोर नगर, सिविल लाइन बलिया के स्थाई निवासी हो गए हैं.

डॉक्टर द्विवेदी का जन्म 1 मार्च, 1951 को गाजीपुर जनपद के सुल्तानपुर गांव में हुआ था. काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और उसी संस्थान से उन्होंने साल 1974 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.

डॉक्टर द्विवेदी की अब तक अनेक कृतियां प्रकाशित हुई है जिसमें घनानंद और उनकी कविता की समीक्षा 1975 में, समीक्षा के नए प्रतिमान की आलोचना 1992 में, मिशा में बंद देश, हिंदी कविता संग्रह 1977 में, अढ़ाई आखर, भोजपुरी काव्य संग्रह 1978 में, राम जी के सुगना, निबंध संग्रह 1994 में, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन में पुरस्कृत हुए हैं. गांव के भीतर गांव, कहानी संग्रह 1998 में , उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार इन्हें प्राप्त हुआ. आंव लवटि चली, कथा संग्रह सन 2000 में प्रकाशित हुआ. इसके अतिरिक्त हिंदी एवं भोजपुरी की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में सैकड़ों रचनाएं जिसमें कविता, कहानी, निबंध समीक्षा और आलेख प्रकाशित हुए हैं.

डॉ अशोक द्विवेदी
डॉ अशोक द्विवेदी

डा. द्विवेदी ने भोजपुरी दिशा बोध के त्रैमासिक पत्रिका पाती का सम्पादन सन् 1979 से निरंतर करते आ रहे हैं. भोजपुरी साहित्य समकालीन भोजपुरी साहित्य के संपादक मंडल में शामिल रहे हैं. डा.द्विवेदी को भोजपुरी भाषा में योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं. साल 1990 में उन्हें जनपदीय गौरव सम्मान, हिंदी प्रचारिणी सभा बलिया के द्वारा प्राप्त हुआ. साल 1994 में कन्हैया लाल प्राग दास हिंदी संस्थान उत्तर प्रदेश ने साहित्यश्री से सम्मानित किया. अखिल भारतीय भोजपुरी परिषद उत्तर प्रदेश के द्वारा भोजपुरी शिरोमणि पुरस्कार प्राप्त हुआ. यह अखिल भारतीय भोजपुरी परिषद उत्तर प्रदेश के द्वारा दिया गया. समर्थ भोजपुरी सेवा सम्मान साल 1997 में भोजपुरी साहित्य मंडल बक्सर के द्वारा द्विवेदी को दिया गया. राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार साल 1968 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ के द्वारा दिया गया. हिंदी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान-2000, विश्व हिंदी सम्मेलन दिल्ली में दिया गया. हिंदी सेवा सम्मान 2000 हिंदी प्रचारिणी सभा बलिया तथा साहित्य भूषण पुरस्कार साल 2001 में सर्जना बलिया संस्था के द्वारा प्राप्त हुआ. नागरी बाल साहित्य संस्थान बलिया के द्वारा साल 2002 में इन्हें प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया. साल 2002 में विश्व भोजपुरी सम्मेलन मऊ मैम भोजपुरी विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है. हिंदी साहित्य तथा भोजपुरी के विकास के लिए बलिया में गठित सम्मानित संस्था हिंदी प्रचारिणी सभा के विकास में डॉक्टर द्विवेदी का योगदान सराहनीय रहा है यह हिंदी प्रचार सभा के सभी कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं.

(बलिया से कृष्णकांत पाठक की रिपोर्ट)

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