सरयू और गंगा के तेवर फिलहाल नरम, मगर किसानों की ‘चुहानी’ में रोटी के लाले

बांसडीह (बलिया) से रविशंकर पांडेय

बलिया दो नदियों के बीच जरूर है. जलस्तर पहले से सरयू नदी का बढ़ता रहा है. हालांकि सोमवार को मीटर गेज पर सामान्य रिपोर्ट आई. वहीं गंगा नदी ने भी तेवर बदला था, लेकिन अब स्थिर मुद्रा में हैं. बांसडीह तहसील के उत्तर दिशा से सरयू नदी वाया रेवती और बैरिया माझी पुल के पास छपरा (बिहार) की सरहद पर गंगा के साथ मिल जाती हैं.

सोमवार को सरयू नदी का जलस्तर सामान्य रहा. मीटर गेज के अनुसार डीएसपी हेड पर 63.07 सामान्य मापा गया, जबकि खतरा बिंदु 64.01 है. वहीं 1998 में सरयू नदी का उच्चत्तम जलस्तर 66.00 था. इस बात को लेकर इलाकाई लोगों में दहशत था कि कहीं हालात उसी तरह न हो जाए. पानी बढ़ा जरूर पर हालात बिगड़ते बिगड़ते बच गया. सरयू में कटान का खतरा रिगवन छावनी से लेकर कोटवा, मल्लाहीचक, सुल्तानपुर, टिकुलिया आदि जगहों पर धीरे धीरे कम हो रहा है.

मनियर क्षेत्र से लगायत बैरिया तक हजारों एकड़ जमीन सरयू ने निगला

फिलहाल सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर भले ही सामान्य है, लेकिन शुरुआती दौर से ही उक्त नदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया था. इसके चलते हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी ने निगल लिया. हालात ये है कि लोगों को भोजन पर भी आफत पड़ने लगा है.

अब तो कोई झांकने भी नहीं आता

सरयू नदी के तटीय इलाके में अब तो कोई झांकने तक नहीं आता. युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में उदासीनता देखी जा रही है. प्रवासी मजदूरों का कहना है कि कोरोना संकट से हम गांव चले आए. जहां दो जून की रोटी मिलती थी, वहां भी लाले पड़े हैं. यहां सरयू नदी ने सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया. कोई आसरा नही दिख रहा. प्रशासन की तरफ से कुछ राहत सामग्री आई थी. उसके बाद समाजवादी पार्टी के लोग भी कुछ सहयोग किए. यहां जो स्थिति बनी है, बेहद खराब है.

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