भरत अखाड़ा का जुलूस पुराने महावीर स्थान से धूमधाम से निकला

आगामी 25 जून को निकलने वाले ऐतिहासिक महावीर झंडोत्सव के तहत भरत अखाड़ा का जुलूस पुराना महावीर स्थान से धूमधाम से निकला.

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25 जून को निकलेगा सिकन्दरपुर का ऐतिहासिक महावीर जुलूस

 ऐतिहासिक महावीरी झंडोत्सव के तहत यहां 25 जून को निकलने वाले जुलूस की विभिन्न तैयारियां तेजी से शुरू हो गई है.

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अकीदत की मिसाल बन रहे हैं ये नए नवेले रोजेदार

नगर के मोहल्ला मिल्की निवासी सर्वेश शर्मा पुत्र पारसनाथ शर्मा ने रमजान के चौथी का रोजा रख गंगा जमुनी तहजीब का मिसाल पेश किया है.

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आखिर खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोजा

खजूर न केवल एक फल, बल्कि एक प्रकार की आयुर्वेदिक दवा भी है. अन्य समुदायों के लोग जहां इसे फल या दवा के रूप में लेते हैं, वही मुस्लिम समुदाय में इस का धार्मिक महत्व है.

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पति के लिए बट सावित्री देवी की पूजा-अर्चना करती हैं महिलाएं 

सुहागन स्त्रियां वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके सिंदूर, रोली, फूल, अक्षत, चना, फल और मिठाई से सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करती हैं.

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निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा

सत्य, प्रेम, करुणा, दया व सहयोग की दैवी राह पर चलने से ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है. चालाकी, होशियारी, छल, कपट और बदले की राह पर दुख और दर्द ही मिलते हैं. यह बातें जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी मारुति किंकर जी महाराज ने कही. वह संत यतिनाथ मंदिर परिसर में चल रहे पांच दिवसीय हनुमान जयंती समारोह के अंतिम दिन मंगलवार की रात प्रवचन कर रहे थे.

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गांव की गलियों से सिमट कर अब कमरों में बंद हो गई होली

होली यानि फागुन मस्‍ती का त्‍योहार है. रंग की पहली याद गांव से ही शुरू होती है. बहुत दिन नहीं हुए, अभी एक दशक पहले तक गांव के सभी बुर्जुग, यूवा घर-घर जाकर फाग गाते थे.

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हर्बल खोज रहे लोग, केमिकल रंगों से पटा बाजार

अब होली के त्योहार पर आम जन मानस भी जागरूक होता जा रहा है. अब सभी लोग रसायनिक रंगों से परहेज करना करना चाहते हैं और उसके स्‍थान पर हर्बल प्राकृतिक रंगों से होली मनाना चाहते हैं, किंतु उन्‍हें बाजारों में हर्बल रंग ढ़ूंढ़ें नहीं मिल रहा है.

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आकर्षण का केन्द्र रही रसड़ा के शिव बारात में निकली झांकियां

श्रीनाथ मठ से महाशिव रात्रि के पर्व पर शिव बरात गाजे बाजे के साथ निकली गयी.

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जन गण के देवाधिदेव ने यहीं भस्म किया था कामदेव को

जन गण मन के आराध्य भगवान शिव एवं शिवरात्रि की सहज उपलब्धता और समाज के आखरी छोर पर खडे व्यक्ति के लिए भी सिर्फ कल्याण की कामना, यही शिव है.

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