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हवा का रुख बलिया के लोग समझ गए होंगे – अखिलेश यादव

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अलावलपुर में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भृगु मुनि और यहां के आजादी का महानायकों को याद करते हुए अपने उद्बोधन की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि बलिया ने पहले समाजवादी प्रधानमंत्री दिया.

बलिया। अलावलपुर में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भृगु मुनि और यहां के आजादी का महानायकों को याद करते हुए अपने उद्बोधन की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि बलिया ने पहले समाजवादी प्रधानमंत्री दिया. यहाँ की जमीन से निकले लोकनायक जयप्रकाश व जनेश्वर मिश्र ने समाजवादी आंदोलन को ऊंचाई दी. मालूम हो कि वरिष्ठ सपा नेता सनातन पांडेय बलिया से गठबंधन उम्मीदवार हैं.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी भी यहीं आए थे. क्या दिए इसकी जानकारी तो नहीं है, लेकिन जिसके पांच वर्ष खत्म हो गए उनसे अब भला क्या अपेक्षा की जा सकती है? मोदी के एक भी वादे पूरे नहीं हुए. अच्छे दिन का वादा किया था. किसानों से लागत का डेढ़ गुना मुनाफा और आय दोगुनी करने का वादा किया था. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. सरकार किसानों की उपज की असली कीमत नही दे पाई. फायदा किसको हुआ सब जानते हैं. करोड़ो बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा करने वाली सरकार ने जीएसटी और नोटबन्दी जैसी समस्या दे दी. नौजवानों ने नौकरी मांगी तो पकौड़ा बनाने की सलाह दे दी.

अखिलेश ने कहा कि यूपी का अंतिम जिला बलिया है और यहां अंतिम चरण में चुनाव है. पिछले एक महीने से यहां के लोग सब कुछ समझ रहे होंगे. बागी बलिया वाले सब जानते हैं कि किस तरफ हवा चल रही है. हवा का रुख यहां के लोग समझ गए होंगे. मौसम के गर्म होने के साथ लोगों का जोश और उत्साह भी बढ़ रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि चाय वाले ही अब चौकीदार बनकर आए हैं. लेकिन उनसे बता देना चाहूंगा कि उनकी चाय में जो नशा था बहुतों का उतर गया है. चाय तो तभी अच्छी बनती है जब दूध अच्छा होगा. जनता सब जान चुकी है. इसलिए चौकीदार की चौकी छीनने वाली है.

पीएम मोदी सरकार बनने के बाद दो बार यहां आए, लेकिन बलिया को कुछ नहीं दिया. जबकि हम बतौर सीएम कभी यहां खाली हाथ नहीं आए. यूपी-बिहार को जोड़ने वाला गंगा पुल जितना समाजवादी सरकार में बना वह उतने पर ही रुका है. एनएच की सड़क का शिलान्यास पांच साल पहले हुआ था, वह जस की तस रही. अखिलेश ने सीएम योगी पर भी जमकर निशाना साधा. कहा, बाबा कहते हैं कि कानून व्यवस्था सही करने के लिए ठोक दो. लेकिन पुलिस को पता नहीं था कि ठोंकना किसको है. मौका मिला तो कभी पुलिस ने पब्लिक को और कभी पब्लिक ने पुलिस को ही ठोक दिया. ठोकने का असर ऐसा हुआ कि सन्तकबीरनगर में सांसद जी ने विधायक जी को ही ठोंक डाला. यही बाबा मुख्यमंत्री की ठोंको नीति है. इसलिए चौकीदार के साथ ही ठोकीदार को भी हटाना है. अखिलेश यादव ने कहा कि सीएम योगी कहते हैं अगर हम मुख्यमंत्री नहीं बनते तो भैंस चरा रहे होते. फिर वे तो मौर्य, प्रजापति और अन्य समाज के बारे में भी ऐसा ही सोंचते होंगे. हम उन्हें बताना चाहते है कि हमारे पिता सीएम और रक्षामंत्री थे. जनता ने ही हमें मौका दिया था और आपको भी दिया है. बाबा से कहना चाहूंगा कि हम तो दूध-घी बेचकर काम चला रहे होते लेकिन संविधान नहीं होता तो बाबा आप किसी मठ में घण्टा बजा रहे होते. उन्होंने कहा कि बलिया से गैस सिलेंडर और चूल्हे बांटे थे. लेकिन ये नहीं बताया कि देश के सारे पुराने सिलेंडर यहीं बांट दिए. यही नहीं, माता बहनों ने दोबारा कभी सिलेंडर नहीं भरवाए. क्योंकि उस समय 400 में मिलने वाला सिलेंडर आज हजार रुपये का है.

अखिलेश ने नोटबन्दी पर भी सरकार को घेरा. कहा, नए नोट पर गवर्नर अर्जित पटेल के दस्तखत होंगें. कुछ नोटों पर गवर्नर रघुराम राजन के थे. रघुराम राजन ने तो नोटबन्दी की सारी पोल खोल दी. बताया कि इसके कितने नुकसान हुए. रोजगार पर असर पड़ा. माता-बहनों को फजीहत हुई. इससे न तो कालाधन वापस आया और न ही भ्रष्टाचार पर रोकथाम लगी. लगभग 36 हजार उद्योगपति भारत छोड़ चले गए. अगर ऐसा ही होता रहा तो यहां विकास कैसे होगा, रोजगार कौन देगा. इसके जिम्मेदार भाजपा और पीएम मोदी हैं.

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