खामोश मतदाताओं ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की चिंता

खामोश मतदाताओं ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की चिंता

गाँव गली मतदाताओं की चुप्पी तुड़वाने की कार्यकर्ता चला रहे जुगत
फेसबुक व वाट्सप पर शोर शराबा अधिक

बैरिया(बलिया)। ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव में अपने अलग तरह के राजनीतिक मिजाज को लेकर बलिया लोकसभा क्षेत्र का बैरिया विधानसभा की पहचान अन्य विधानसभाओं से हट के है. यहां घर-घर नेता हैं, और राजनीति में दखलंदाजी करने से कोई अवसर नहीं चूकते. लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव मे विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की रहस्यमय चुप्पी प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को सांसत में डाले हुए है. यद्यपि कि इसकी वजह इस इलाके के राजनीति के जानकार टिकट को लेकर भाजपा के भरत सिंह व सपा के नीरज शेखर का टिकट कटना तथा नए प्रत्याशियों का आ जाना मान रहे हैं. उसमें भी गठबंधन का टिकट सबसे बाद में अन्तिम समय में जारी होना मतदाताओं की खामोशी की बड़ी वजह मानी जा रही है.
यूँ तो सोशल साइट फेसबुक व वाट्सप पर मचाने वाले जोरदार हंगामा मचाए हुए हैं. लेकिन उनकी संख्या यहाँ के पूरी आबादी का एक प्रतिशत भी नहीं है. कुछ लोग तो फेसबुक व वाट्सप पर के पोस्ट को ही प्रचार का सबसे मजबूत माध्यम मान कर चल रहे हैं.

सपा के बैरिया विधानसभा उपाध्यक्ष अजय सिंह का कहना है कि सपा बसपा गठबंधन के मतदाता अपने जगह ठीक हैं. वह खामोश है. तभी भला है. सपा व बसपा के कार्यकर्ता अपने मतदाताओं से अन्य बातों को बताने के साथ चुप रहने और अपने वोट को जाकर डाल आने का सुझाव भी दे रहे है. ऐसे में गठबंधन के मतदाताओं की खामोशी तूफान के पहले वाला सन्नाटा है. 23 मई को देखिएगा।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह का कहना है कि हमारा संगठन बहुत मजबूत है. कार्यकर्ता व पदाधिकारी दिन रात जनसम्पर्क में लगा है. अभी गेहूं कटाई दंवाई का समय चल रहा है. सब अपने काम में लगे हैं. दस मई के बाद सब सामने आने लगेगा. लोग मोदीजी को एक और मौका देने का मन बना चुके हैं . इस लिए शांत है.
बसपा के बैरिया विधानसभा के पूर्व प्रभारी ददन राम का कहना है कि हमारे मतदाता तो हमेशा खामोश ही रहते हैं. इस बार गठबंधन के वजह से हमारे लोग काफी उत्साहित है. पूर्व के अपेक्षा हमारे मतदाता अधिक ही मत ही गिराएगे. कम नहीं होगा.
कुल मिलाकर बैरिया विधानसभा में चट्टी चौराहे, चायपान की दुकानो पर भी इस बार चुनावी चर्चा पहले की तुलना में काफी कम देखी जा रही है. जो राजनीति के समीकरण बाजों व गणित बाजों की अक्ल जाम किए हुए है.

चर्चा हो भी रही तो बिते लोकसभा व विधानसभा चुनाव के परिणामों पर

सन्नाटे के अलावा कहीं कहीं राजनीतिक चर्चा चल भी रही है, तो वह पिछले लोगसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के परिणामों को लेकर हो रही है. लोग लोकसभा चुनाव 2014 व विधानसभा चुनाव 2017 मे प्रत्याशियों के पाए गए मतों को कागज पर लिख कर या फिर मोबाइल पर नोट के इनका इतना तो अबकी बार इतना की गणितबाजी कर रहे है.विगत लोकसभा चुनाव 2014 में भरत सिंह- भाजपा- 359758, नीरज शेखर सपा- 220324, अफजाल अंसारी – 163943, टुनजी पाठक (बासपा)- 141684 व
सुधा राय (कांग्रेस) को 13501मत मिले थे.

जबकि बीते विधानसभा चुनाव में सुरेन्द्र नाथ सिंह भाजपा को 64868 मत, जयप्रकाश अंचल सपा को 47791 मत, जवाहर वर्मा बसपा को 27774 मत, आशनी सिंह निर्दल को 6122 तथा मनोज सिंह निर्दल को 5946 मत मिले थे. चर्चा में इसी आकड़े को लेकर मगजमारी हो रही है. इन सब के बावजूद बैरिया विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचल मे चुनावी रंग उस अंदाज से नहीं चढ़ पाया है, जैसे पूर्व के चुनावों मे होता रहा है. जबकि मतदान के केवल 12 दिन ही शेष बचे हैं. यह खामोशी कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है.

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