आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस ने मनाया स्वामी विवेकानंद की जयंती 

आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस ने मनाया स्वामी विवेकानंद की जयंती 

युवाओं के कंधों पर युग की चलती है कहानी: डॉ. आफताब आलम

बलिया। आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस के प्रांगण में नया विचार नई ऊर्जा फाउंडेशन बलिया व नेहरू युवा केंद्र द्वारा शनिवार को राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन किया गया. मुख्य विषय शिक्षा क्रांति में युवाओं का योगदान रहा. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक वरिष्ठ पत्रकार एवं विशिष्ट अतिथि शिवजी पांडेय रसराज थे. आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस के चेयरमैन मो मेराज आलम, नया विचार नई ऊर्जा फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर मो. आफताब आलम, जिला उपाध्यक्ष डॉक्टर सुधीर सिंह, जिला सचिव स्वास्थ्य डॉक्टर जियाउल हुदा, जिला रिसर्च एंड डेवलमेंट प्रभारी स्वेतांक सिंह एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा महर्षि विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पण किया गया.
उनके विचारों पर सभी लोगो ने प्रकाश डाला और आज की युवा पीढ़ी को उनके सुझाए हुए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया. मुख्य अतिथि ने विवेकानंद जी को युवाओं का प्रेरणा श्रोत बताया. डॉक्टर आफताब आलम ने कहा कि बुलबुल के परो में बाज नहीं होते, कमजोर और बुजदिलों के हाथों में राज नहीं होते, जिन्हें पड़ जाती है झुककर चलने की आदत, दोस्तों उन सिरों पर कभी ताज नहीं होते. शायर ने कहा है- ‘युवाओं के कंधों पर युग की कहानी चलती है, इतिहास उधर मुड़ जाता है जिस ओर ये जवानी चलती है.‘ हमें इन भावों को साकार करते हुए अंधेरे को कोसने की बजाय ‘अप्प दीपो भव:‘ की अवधारणा के आधार पर दीपक जला देने की परंपरा का शुभारंभ करना होगा.
स्वामी विवेकानंद की याद में भारत में प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस‘ मनाया जाता है. लेकिन आज भारत की युवा ऊर्जा अंगड़ाई ले रही है और भारत विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला देश माना जा रहा है. इसी युवा शक्ति में भारत की ऊर्जा अंतरनिहित है. इसीलिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने ‘इंडिया 2020‘ नाम की अपनी कृति में भारत के एक महान राष्ट्र बनने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. महत्व इस बात का है कि कोई भी राष्ट्र अपनी युवा पूंजी का भविष्य के लिए निवेश किस रूप में करता है? हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व देश के युवा बेरोजगारों की भीड़ को एक बोझ मानकर उसे भारत की कमजोरी के रूप में निरूपित करता है या उसे एक कुशल मानव संसाधन के रूप में विकसित करके एक स्वाभिमानी, सुखी, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनाता है. यह हमारे राजनीतिक नेतृत्व की राष्ट्रीय व सामाजिक सरोकारों की समझ पर निर्भर करता है. साथ ही, युवा पीढ़ी अपनी ऊर्जा के सपनों को किस तरह सकारात्मक रूप में ढालती है, यह भी बेहद महत्वपूर्ण है.
अंततः हमें इस युवा शक्ति की सकारात्मक ऊर्जा का संतुलित उपयोग करना होगा. कहते हैं कि युवा वायु के समान होता है. जब वायु पुरवाई के रूप में धीरे-धीरे चलती है तो सबको अच्छी लगती है. सबको बर्बाद कर देने वाली आंधी किसी को भी अच्छी नहीं लगती है. हमें इस पुरवाई का उपयोग विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में करना होगा. यदि हम इस युवा शक्ति का सकारात्मक उपयोग करेंगे तो विश्व गुरु ही नहीं, अपितु विश्व का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा के रूप में भी जाने जाएंगे. विवेकानंद हमारे साथ शाश्वत रूप से विद्यमान रहेंगे उनके विचार अमर हैं और अपना प्रेरणा श्रोत गंभीर सिंह जी को बताया. डॉक्टर जियाउल हुदा द्वारा भी उदगार व्यक्त किए गए. सेवा सदन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक डॉक्टर कुमार सुधीर सिंह ने शिक्षा क्रांति को आज का सबसे आवश्यक हथियार माना है. जिला रिसर्च एंड डेवलमेंट प्रभारी स्वेतांक कुमार सिंह ने नेशनल यूथ पार्लियामेंट का जिक्र करते हुए विवेकानंद को नवजागरण का जनक बताया और मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताया.
इसीक्रम में नेहरू युवा केंद्र के कार्यक्रम समन्यवक शरत सौरभ ने विचार व्यक्त किए. इस कार्यक्रम में नीतू सिंह, डाक्टर नौशाद, डॉक्टर दिलशाद, चन्द्र प्रताप सिंह, पूजा सिंह, काजल राय, मो. एजाज, मो. जुनेद, मो. अरशद, अर्श पब्लिक स्कूल, मदरसा संजारी दारुल उलूम रतसर, फरहद जया, राहत अली एवं अन्य सम्मानित व्यक्ति उपस्थित थे.

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