प्रधानमंत्री आवास योजना में सूची को लेकर अधिकारी भी असमंजस में

प्रधानमंत्री आवास योजना में सूची को लेकर अधिकारी भी असमंजस में

जांच के लिए कोडरहां नौबरार पहुंचे खण्ड विकास अधिकारी पड़े मुश्किल में

दोकटी (बलिया)। प्रधानमंत्री आवास की सूची से अपात्रों की छंटनी करना बड़ा ही मुश्किल काम है। प्रधान चाह कर भी किसी के नाम को हटा नहीं सकते। यह सब वर्ष 2011 में हुई आर्थिक जनगणना की सूची में गड़बड़ी के कारण हुआ है। हर जगह के प्रधान इस गड़बड़ी को लेकर परेशान हैं। उन्हें यह भी पता है कि सूची में कौन अपात्र हैं लेकिन वे कुछ नहीं सकते। इस सरकारी प्रावधान को लेकर मुरलीछपरा के कोड़हरा नौबरार, जयप्रकाशनगर की प्रधान रुबी ¨सह ने एक पत्र जिलाधिकारी को देकर कई तरह की परेशानियों से अवगत कराया है। उन्होंने खुद के पंचायत कोड़हरा नौबरार में प्रधानमंत्री आवास का हवाला देते हुए कहा है कि यहां सूची के अनुसार कुल 124 पात्र अवशेष रह गए हैं। इनमें ऐसे लोग भी हैं जो संयुक्त परिवार में रहते हैं। वहीं कुछ के नाम के आगे पिता का ही नाम नहीं है। ऐसे में स्पष्ट कर पाना कि कौन पात्र है और कौन अपात्र, बड़ा मुश्किल काम है। इसलिए अधिकारी ही यहां अपात्रों की छंटनी कर दें।

जांच के दौरान भी उलझे अधिकारी
प्रधानमंत्री आवास के प्रकरण में ही अपात्रों की जांच करने जब मुरलीछपरा छपरा के बीडीओ रणजीत कुमार ग्राम पंचायत कोड़हरा नौबरार में पहुंचे तो वे भी उलझन में पड़ गए। उनके सामने भी यह बात सामने आई कि एक घर में पांच भाई रहते हैं। उसमें से एक भाई का नाम प्रधानमंत्री आवास की सूची में है। उसके नाम कोई जमीन या पैतृक संपत्ति नहीं है। ऐसे में उसे कैसे अपात्र घोषित किया जाए बड़ा ही मुश्किल हैं। इस वजह से जांच करने पहुंचने वाले अधिकारी भी अपात्रों को सूची से बाहर करने में एक तरह विफल ही हैं।

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