व्रतियों ने दिए सायंकालीन अर्घ्य, पराकाष्ठा पर दिखी भक्ति

व्रतियों ने दिए सायंकालीन अर्घ्य, पराकाष्ठा पर दिखी भक्ति

बलिया। छठ पर्व के तीसरे दिन मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्‍य दिया गया. इसके बाद अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन हो जाएगा. श्रद्धालु अपराह्न काल से ही छठ घाटों पर पहुंचने लगे थे. पर्व को लेकर पूरे जनपद में भक्ति व उत्‍साह चरम पर दिखा.
छठ को लेकर नदियों व तालाबों व उपासना स्थलों तथा काफी जगह अपने द्वार व छत के घाट सजे-धजे दिख रहे हैं. वहीं श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए सड़कें भी साफ-सुथरी कर दी गईं हैं.
छठ का सायंकालीन अर्घ्‍य संपन्‍न हो चुका है. सांघ्‍यकालीन अर्घ्‍य के बाद व्रती व श्रद्धालु घर लौट गए. प्रात:कालीन अर्घ्‍य देने सुबह में वापस लौटेंगे.

बलिया में सायंकाल प्रथम अर्घ्य का समय 4.45 बजे से 5.20 बजे के बीच था. बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने का समय प्रात: 6.32 से 7.15 बजे तक का है.

छठ घाट जाने के लिए सपरिवार व्रती महिलायें अपराह्न होते ही निकल पड़ी. छठ घाट पर पश्चिम दिशा में वेदी के पास बैठकर सूर्य को प्रसन्न करने के लिए वंदन व गीत गाती रही. सूर्य का रंग लाल होने पर महिलाओं ने पुत्र, पति अथवा पंडित से जल लेकर सूर्य को अर्घ्य दिया.

मंगलवार का दिन व्रती महिलाओं का उपवास का पहला दिवस था. निर्जला व्रत रहकर नंगे पैर घाट तक पहुंची महिलाओं ने पहले से तैयार वेदी पर सूर्य के निमित्त चंदन व अन्य सुगंधित वस्तुएं छिड़ककर मौसमी फलों को चढ़ाया. वेदी के पास परिवार के सभी सदस्य बैठकर सूर्य की आराधना में तल्लीन दिखे. छठ घाटों को बिजली से सजावट करने के बावजूद घी के दीपक जलाएं गए. यह अखण्ड दीपक घर पर भी पूरी रात जलता रहता है, और दूसरे दिन घर से जलता हुआ दीपक पूजन सामग्री के साथ छठ घाट आकर वेदी पर सूर्योदय तक जलता रहेगा. कुछ परिवारों में दूर-दूर से रिश्तेदार भी इस सामूहिक पूजा को देखने के लिए आए हुए थे.

शहर में भृगुजी मंदिर का रामलीला मैदान, जापलिनगंज का रामलीला मैदान, टाउन हाल का मैदान, मिड्ढ़ी में शिव मंदिर के अलावे महावीर घाट, गायत्री धाम मंदिर, शनिचरी मंदिर सहित गंगा के किनारे बसे लोग गांवों से बाहर गंगा नदी के छाड़न के किनारे वेदी बनाकर पूजा किया. इन सभी घाटों को पूजा कमेटियों के सहयोग से जनरेटर आदि की व्यवस्था कर सजाया गया था. हर व्रती एक-दूसरे को छठ की बधाईया देने के साथ दूसरे के कल्याण की कामना कर रही थी. छठ पूजा को देखत हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. भीड़-भाड़ वाले इलाके में फायर ब्रिगेड भी ड्यूटी लगाई गयी थी. सभी थाना प्रभारी तथा चौकी प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में चक्रमण करते रहे. आने-जाने वाले रास्तों तथा महत्वपूर्ण मंदिरों पर पुलिस की तैनाती की गई थी.

नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष समाजसेवी अजय कुमार ने महावीर घाट पर फीता काटकर तथा छठी मईया की पूजा कर इस लोक आस्था के महान पर्व का शुभारम्भ किया. इसी प्रकार गांवों में ग्राम प्रधानों ने सूर्य पूजा का शुभारम्भ किया. घाट दीपों के अलावे नाना प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रां के माध्यम से छठ गीतों से गुलजार हो रहे थे. इन पूजा स्थलों के आसपास छोटी-छोटी दुकानें भी लगी हुई थी, जहां पूजन सामग्री भी बिक रही थी.

लोक मंगल की कामना के साथ किन्नरों ने भी की छठ पूजा

छठ महापर्व पर भगवान सूर्य का पूजा अर्चना करने के लिए छठ व्रती महिलाओ के साथ साथ किन्नर समाज के लोग भी छठ पूजा करने छठ घाट पहुंची.

आम तौर पर यह पूजा महिलाएं अपने बच्चों और अपने परिवार के लिए करती हैं मगर किन्नर समाज के लोगों का कहना है कि हम लोग अपने समाज के साथ साथ सभी जनमानस के लिए यह छठ पूजा करती है.

बिल्थरारोड क्षेत्र के ग्राम सभा बहुता चक उपाध्याय में बीच पोखरे में पूजा पंडाल बनाकर छठ माँ की स्थापित की गयी. मूर्ति लोगो के आकर्षण का केन्द्र बना है. इस पूजा समित्ति के अध्यक्ष छोटेलाल यादव ने बताया कि पोखरे के बीच में पण्डाल बनाने का कार्य में चार दिन का समय लगा. ऐसा पण्डाल पहली बार बनाया गया है. इस पण्डाल में जाने के लिए और आने के लिए अलग अलग रास्ते है.

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