ज्ञान, दान ,बलिदान, तपस्या इहवां के परिपाटी है…

ज्ञान, दान ,बलिदान, तपस्या इहवां के परिपाटी है…

130 दीप जला कर बोले बलिया हैप्पी बर्थडे

बलिया। वैदिक रीतियों से 139 दीप जला कर मना बलिया जिले का बर्थडे. कवि साहित्यकारों ने सोहर और गीत गाये , मिठाई बंटी .
शहीद पार्क चौक में सेनानी संगठन की प्रान्तीय उपाध्यक्ष श्रीमती राधिका मिश्रा के सांनिध्य में जिले के प्रथम नागरिक जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर पासवान, नपाध्यक्ष अजय कुमार समाजसेवी, भानु प्रकाश सिंह बबलू पूर्व सीएमओ डॉ बद्री नारायण गुप्त, अरुण कुमार, मान्धाता सिंह, प्रो केपी श्रीवास्तव, डॉ इफ्तिखार खां ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत किया.


जिले के इतिहास को रेखांकित करते हुए एसओसी डॉ दयानंद सिंह चौहान ने बताया कि ब्रिटिश सरकार ने बंगाल और बनारस डिविजन तक फैले कानून व्यवस्था के लिये सिरदर्द बने भू- भाग को जिला बना दिया.
शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने एक नवम्बर को देश के छः प्रदेशों का भी स्थापना दिवस है . जिसमें मध्यप्रदेश, कर्नाटक और केरल स्थापना की आयु में बलिया जिले से 77 वर्ष छोटे है. हरियाणा और पंजाब 87 साल और छत्तीसगढ़ 121वर्ष छोटे हैं .
जिले के जन्मदिन पर कवि नंदजी नंदा जी ने बैकुंठ बलिया इ त्रिभुवन में पावन, रमाशंकर मनहर ने कहा कि दुनिया में सुन्दर हिन्दुस्तान चमके जेमे यूपी की बलिया के शान चमके . फतेहचंद बेचैन ने सुनाया स्वतंत्रता की बलिवेदी हमने जान गंवाई है. शायर हफीज मस्तान के ललकारा जान से भी प्यारा चमकता रहे बलिया. कवि शशिप्रेम देव ने कहा कि ज्ञान, दान ,बलिदान, तपस्या इहवां के परिपाटी है. श्रीराम सरगम गाया लाठी, बाटी बागी बलिया की माटी की परिपाटी है.
डॉ जितेन्द्र स्वाध्यायी, सुदेश्वर अनाम,
अरुण कुमार, दिनेश मद्धेशिया, विजयानंद पाण्डेय, योगेन्द्र प्रसाद गुप्ता, पारसनाथ वर्मा, अरुण कुमार त्रिपाठी, विजय बहादुर सिंह, रामनाथ सिंह, आदि ने संबोधित किया.

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