शौचालय सत्यापन को जिलाधिकारी निकले गांवों की ओर, देखा सच

शौचालय सत्यापन को जिलाधिकारी निकले गांवों की ओर, देखा सच

रेवती ब्लाॅक के खानपुर डुमरिया में किया भ्रमण, पाई बेहद खराब स्थिति

सचिव पर बड़ी कार्रवाई, प्रधान के वित्तीय पाॅवर सीज करने के दिए संकेत

बलिया। विगत तीन महीनों से दिए जा रहे निर्देश के बाद शौचालय निर्माण की स्थिति को देखने के लिए अब जिलाधिकारी ने गांवों की तरफ कूच करना शुरू कर दिया है. रविवार को वे रेवती ब्लाॅक के खानपुर डुमरिया गांव में गये तो अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली. पूर्व सूचना के बावजूद पंचायत सचिव गायब थे. वहीं, कड़ी धूप में करीब दो घंटे गांव में पैदल भ्रमण के दौरान प्रधान एक भी ऐसा शौचालय नहीं दिखा सके, जो कि प्रयोग हो रहा हो. इसके अलावा कुछ हैण्पम्प छः महीनों से खराब मिले. नाली निर्माण में गड़बड़झाला, जल निकासी की समस्या व आवास आवंटन में भी अनियमितता की शिकायत मिली. लम्बे समय से प्रिया साफ्ट की फीडिंग नहीं हुई थी. इस पर ताज्जुब जताते हुए जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को निर्देश दिया कि सचिव के विरूद्ध बड़ी कार्रवाई हो. वहीं जरूरत पड़ने पर प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर खतरे के संकेत दिए.


जिलाधिकारी ने सबसे पहले शौचालय निर्माण की समीक्षा की. बताया गया कि वर्ष 2016-17 में कुल 70 शौचालय दिए गए जिसके सापेक्ष मात्र 32 शौचालयों का एमआईएस हो चुका है. लेकिन जमीन पर एक भी शौचालय प्रयोग होते नहीं दिखा. यही नहीं, बाकी 35 शौचालयों का पैसा डेढ़ साल से डम्प होने पर नाराजगी जताते हुए बीडीओ को आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया. कहा कि जनहित में होने वाले कार्य के प्रति लापरवाही बरतने पर सख्ती बरतें. वर्तमान समय तक 129 शौचालय का पैसा गांव में पड़े होने के बावजूद निर्माण की स्थिति बेहद खराब है. कुल मिलाकर गांव में 85 फीसदी घर शौचालयविहीन बताए गए. कई ऐसे शौचालय बने थे जो दरवाजा, दीवाल व छत लग चुके थे लेकिन गड्ढ़ा व सीट ही नहीं लगे थे. राजभर बस्ती में बन रहे शौचालय जरूरी नक्शे के विपरीत बनते देख कहा कि तकनीकी पहलू को भी ध्यान में रखा जाए. आवास आवंटन में भी अनियमितता की शिकायत ग्रामीणों ने की.

बेहद खराब निर्माण सामग्री देख भड़के, जेल भेजने की दी चेतावनी

गांव में पैदल भ्रमण के दौरान शौचालय व नाली निर्माण में प्रयोग किये जा रहे ईंट की बेहद खराब गुणवत्ता पर जिलाधिकारी ने कड़ी आपत्ति जताई. मौके पर सचिव तो नहीं मिले लेकिन प्रधान को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जनहित में होने वाले काम में इस तरह का मैटेरियल कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इससे बाज जाएं वरना इस तरह लूट-खसोट करने वाले जेल की सलाखों के पीछे होंगे. डीपीआरओ व बीडीओ को इसकी रिपोर्ट तैयार कर जिम्मेदारों के विरूद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. कुछ खराब हैण्डपंप दिखने पर कहा कि यह ग्राम पंचायत से होने वाला काम है और गर्मी में ही हो जाना चाहिए था. बताया गया कि ये हैंडपम्प पिछले 6 महीने से खराब हैं. गांव में हुए कार्य से जिलाधिकारी बेहद असंतुष्ट दिखे.

पास में 20 हजार का फोन लेकिन घर मे शौचालय नहीं

सरकार का पूरा जोर है गांव-गांव, घर-घर शौचालय हो. इसमें सरकार आम जनता के भी सहयोग की अपेक्षा कर रही है. लेकिन गांव में कुछ ऐसे भी परिवार देखने को मिल जा रहे हैं जिनके पास 5 से 10 लाख रुपए तक का घर है. चार पहिया या दो पहिया वाहन है. दस से बीस हजार तक का मोबाइल फोन पास में है. लेकिन इससे कम लागत का एक शौचालय नहीं है. जबकि शौचालय घर की प्रतिष्ठा से जुड़ी चीज है. सरकार ने इसीलिए इसका नाम इज्जत घर रखा है. रेवती विकासखंड के खानपुर डुमरिया गांव में जिलाधिकारी को भी ऐसा ही एक उदाहरण दिखा, जब एक लड़के के हाथ में 20 हजार का मोबाइल था और वह शौचालय की मांग कर रहा था. जिलाधिकारी ने भी मौके को भुनाते हुए उसको समझाया कि आपके मोबाइल से भी कहीं कम लागत यानि 10 से 15 हजार का शौचालय बनवा लें. अगर सक्षम नहीं होंगे तो सरकार आपको 12 हजार का प्रोत्साहन राशि जरूर देगी. उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील किया कि जिनके घर शौचालय नहीं है वे बेफिक्र होकर शौचालय बनवाएं और 12 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि पाएं.

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