करोड़ों के कटानरोधी कार्यों की हो टेक्निकल जांच, बलिया सांसद ने सीएम से लगाई गुहार

पत्र में इन कार्यों की टेक्निकल टीम से जांच कराने तथा जांच पूरा होने तक कार्यदाई संस्था का भुगतान रोकने का अनुरोध

बलिया से वीरेंद्र नाथ मिश्र

सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने करोड़ों की लागत से बैरिया विधानसभा क्षेत्र में कटान रोधी कार्यों में लूट खसोट व भ्रष्टाचार का टेक्निकल जांच कराने के लिए सीएम को पत्र भेजा है.

बताते चलें कि भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बलिया के भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बकुल्हा-संसार टोला तटबंध के स्पर क्षतिग्रस्त होने तथा बैरिया विधानसभा क्षेत्र में गंगा और घाघरा के कटान रोधी कार्यों में लूट खसोट, भ्रष्टाचार की जन शिकायतों पर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ से मोबाइल पर बात की और यहां की जन शिकायतों से उन्हें अवगत कराया. बलिया सांसद ने मुख्यमंत्री से इन कार्यों की टेक्निकल टीम से जांच कराने तथा जांच पूरा होने तक कार्यदाई संस्था का भुगतान रोकने का अनुरोध किया है.

संसदीय कार्यालय सोनबरसा बैरिया से मुख्यमंत्री के पास भेजे गए पत्र की कॉपी क्षेत्रीय संवाददाताओं को भी जारी की गई है. इसमें करोड़ों की लागत से गंगा नदी का ड्रेजिंग कार्य, दुबेछपरा, नौरंगा का पारक्यूपाइन कार्य, रामगढ़ और गंगापुर में लोहे की जाली में पत्थर के बोल्डर डालकर अवशेष गांव तथा एनएच 31 को सुरक्षित करने का कार्य, घाघरा नदी से बचाव के लिए अठगांवां आदि अलग-अलग जो कार्य चल रहे हैं, जिसमें लगभग एक अरब रुपये तथा पिछले साल लगभग 40 करोड़ की लागत से बने दुबेछपरा रिंग बंधा, जो लगभग एक किमी लंबाई में ध्वस्त हो गया था, इसका भी जिक्र करते हुए रेखांकित किया गया है.

सांसद ने पत्र में लिखा है कि यहां की जनता द्वारा सामूहिक रूप से तथा सार्वजनिक रूप से बाढ़ कटान रोधी कार्यों की गुणवत्ता की शिकायत तथा लूट खसोट व भ्रष्टाचार की मुखरित हो कर शिकायत की जा रही है. ऐसी शिकायतों को नजरअंदाज करना किसी भी तरह से ठीक नहीं है जबकि शिकायतों को अनसुना किया जा रहा है. इसी साल लगभग साढ़े 6 करोड़ की लागत से बकुल्हा-संसार टोला तटबंध पर बना टी स्पर पिछले 2 अगस्त को क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि यहीं पर 2 साल पहले भी 6 करोड़ से अधिक रुपये खर्च कर कटान रोधी कार्य करवाए गए थे.

वहीं रामगढ़ गंगापुर में लोहे की जाली में भरकर लगाए गए पत्थर खिसकने लगे हैं. दुबे छपरा और नौरंगा के लोग पारक्यूपाइन पद्धति कार्य के बावजूद भी और सुरक्षा के भय से ग्रस्त हैं. इन सब कार्यों की टेक्निकल टीम से जांच करवाकर जनता के बीच सार्वजनिक करना कथा गलत पाए जाने पर कार्यदाई संस्था पर कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार और खसोट के मामले को जनता के बीच अनावरण करने का अनुरोध किया है.

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