सरयू के तेवर ने उड़ाई तटवर्तियों की नींद, प्रशासन एलर्ट मोड में

बांसडीह क्षेत्र के ककर्घट्टा, टिकुलिया, पर्वतपुर, जयनगर, खेवसर, रघुवर नगर, रामपुर नम्बरी आदि गाँवों के घरों तक पानी पहुँच चुका है

बाँसडीह (बलिया) से रविशंकर पांडेय


सरयू (घाघरा) नदी के लगातार जलस्तर में वृद्धि के चलते प्रशासन एलर्ट मोड में आ चुका है. दो दिन पहले जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही का तूफानी दौरा हुआ था. वहीं टीएस बंधा के खतरा को देखते हुए डीएम ने मातहतों को सख्त निर्देश दिया था. यही वजह है कि प्रशासन हरकत में आकर 15 नांवों की व्यवस्था कर मौके पर भेज दिया है.


बांसडीह क्षेत्र के ककर्घट्टा, टिकुलिया, पर्वतपुर, जयनगर, खेवसर, रघुवर नगर, रामपुर नम्बरी आदि गाँवों के घरों तक पानी पहुँच चुका है. फसल बर्बाद हो चुकी है. हालाँकि सोमवार की सुबह सरयू डीएसपी हेड मीटर गेज पर 64. 940 मापा गया, जबकि खतरा 64.01 है. अभी भी जलस्तर में अनवरत वृद्धि जारी है. उधर, बिल्थरारोड में तुर्तीपार हेड पर सोमवार को नदी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गई. दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 65.01 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि यहां खतरा बिदु 64.01 मीटर है. जलस्तर प्रति घंटे दो सेमी की रफ्तार से बढ़ रही है. रेवती क्षेत्र के चांदपुर में भी घाघरा खतरा बिदु से 88 सेमी ऊपर बह रही है.

तहसीलदार गुलाबचन्द्रा ने बताया कि पानी के अनवरत बढ़ने से टीएस बंधे से बिंद बस्ती तक पाँच नांवों की व्यवस्था, दियरा से बिंद बस्ती एक नांव, रामनाथ के डेरा से चांदपुर बांध, बरई टोला से गभीरार बांध तक, लक्ष्मण के डेरा से शुभहता तक, संत के डेरा से गभीरार बांध, दिया के डेरा से शुभहता तक व अन्य आदि जगहों पर नांव की व्यवस्था की गई है.

लोगों ने लगाई गुहार, साहब सब कुछ लूट गया, हम अब कहीं के नहीं रहे

एक तरफ कोरोना महामारी की त्रासदी से लोग कराह रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरयू नदी ने उग्र रूप धारण कर लिया है. ऐसे में इलाकाई लोगों में भय इतना व्याप्त है कि तमाम व्यवस्था के बावजूद भी लोग सहमे हुए हैं. एक 82 वर्षीय बुजुर्ग ने रोते हुए कहा कि साहब उम्र के अंतिम पड़ाव हैं. महामारी तो बहुत हमने देखी. परन्तु ऐसी महामारी हमने नहीं देखी थी. आप लोग ध्यान नहीं देंगे तो सब कुछ लूट गया. हम अब कहीं के नहीं रहे.


बाँसडीह एसडीएम दुष्यंत कुमार मौर्य और तहसीलदार गुलाब चन्द्रा ने तटीय इलाके का लगातार दौरा कर रहे हैं. अधिकारी द्वय ने टीएस बंधा पर पहुंचकर जायजा लिया. चूंकि सरयू नदी के जलस्तर वृद्धि से बाढ़ का पानी बंधा तक पहुंचते ही अन्य गांवों पर खतरा बढ़ जाएगा. अधिकारी द्वय को ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि साहील (कांटेदार जानवरों) ने बंधा को अन्दर से खोखला कर दिया है. यह जानवर मिट्टी में जगह बनाकर रहते हैं. ऐसे में टीएस बंधे पर खतरा है. एसडीएम दुष्यंत कुमार मौर्य ने कहा कि निगरानी रखी जा रही. हरसम्भव कोशिश होगी कि आम जन को कोई दिक्कत न हो. इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा तैयारी की जा चुकी है.


बिल्थरारोड क्षेत्र के तुर्तीपार, इद्रानगर और चंदायरकला के मोहरोडीह में बाढ़ का पानी घुस गया है. इसके चलते लेागों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. लोग अपने घरों के छतों पर रहने को विवश हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन नदी के इस भयावह स्थिति से पूरी तरह से अंजान बना है. इसके अलावा तुर्तीपार, मुजौना, इंद्रानगर, हल्दीरामपुर क्षेत्र की सैकड़ो एकड़ धान व मूंगफली की फसल डूब गई है. उधर हाहानाला, छोटकी टंगुनिया, खैरा, तुर्तीपार, मुजौना व रामपुर में नदी तबाही मचाने लगी है.

बैरिया क्षेत्र के सठिया ढाला के निकट बीएसटी बंधा पर घाघरा के बढ़ते दबाव से लोग बेचैन हो उठे हैं. खुदा न खास्ता यदि बांध टूटा तो लगभग चार दर्जन गांवों की डेढ़ लाख की आबादी सीधे इस कटान से प्रभावित हो सकती है. जिला प्रशासन कटान रोकने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है.

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