महर्षि वाल्‍मीकि, माता सीता और कुश से जुड़ते हैं छितेश्वरनाथ मंदिर के कनेक्शन

बलिया की धरा देवी देवता ऋषियों मुनियों की बदौलत जानी जाती है. जी हां, बात कर रहे है शंकर महादेव के मंदिरों की. वैसे तो हर शिवालयों का अलग ही महत्व है.

बांसडीह से रविशंकर पांडेय

बलिया की धरा देवी देवता ऋषियों मुनियों की बदौलत जानी जाती है. जी हां, बात कर रहे है शंकर महादेव के मंदिरों की. वैसे तो हर शिवालयों का अलग ही महत्व है. इसी कड़ी में बांसडीह ब्लॉक अंतर्गत छितौनी में स्थित आदि ऋषि महर्षि वाल्मीकि के आचार्यत्व व माता सीता द्वारा स्थापित छितेश्वर नाथ महादेव शिवलिंग की चर्चा होती है.

जनश्रुतियों की माने तो कुस के जन्म के उपरांत कुशेश्वर नाथ के रूप में इसे स्थापित किया गया. छितौनी के ठीक बगल में कुसौरा गाँव और छितौनी स्थित वाल्मीकि आश्रम इस बात का प्रमाण है. बाद में जब महर्षि वाल्मीकि ने इस स्थान से अपना आश्रम कहीं अन्यत्र स्थापित किया तो यह स्थान वीरान हो गया और यह शिवलिंग धरती के नीचे दब गया.

लगभग 800 साल पहले छितौनी से पांच किलोमीटर दूर बहुवारा गाँव के लोग दर्शन करने गंगा पार जाते थे, तभी एक सज्जन के सपने में भोलेनाथ ने छितौनी में होने का संकेत दिया. फिर उक्त स्थान के सभी गाँव के लोग मिलकर इस स्थान पर खुदाई किए. इसके बाद छितेश्वर नाथ का शिवलिंग विग्रह प्राप्त किया.

शिव लिंग को ऊपर लाने का बहुत प्रयास महीनों हुआ. पर वह शिवलिंग बार बार उतना ही नीचे चला जाता. तभी एक महात्मा आए और लोगों से इन्हें इसी तरह पूजा करने की सलाह दी. क्षीतीश्वर नाथ का नाम देकर वे महात्मा अंतर्ध्यान हो गए. बाद में यह नाम छितेश्वर नाथ के नाम से विख्यात हुआ यह मंदिर. यहां मांगी हर मुराद आज भी पूरी होती है. शिवलिंग का दर्शन पाने के लिये लोग बहुत दूर दूर से आते हैं. यहां रोज हजारों लोग दर्शन के लिये आते हैं. श्रावण मास में और शिवरात्रि में यहां मेला लगता है. लोग खूब जलेबी और सब्जी का आनंद लेते हैं.

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