General Desk August 14, 2019

बलिया। न्याय के लिए एक विवाहिता टीडी कॉलेज चौराहे पर स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार रामदहिन ओझा की प्रतिमा के पास गुहार लगा रही थी. वह खुद और अपने 2 मासूम बच्चों को लोहे की जंजीरों में बांध कर धरने पर बैठ थी. बीच चौराहे पर जंजीरों से कैद बच्चों को लेकर धरने पर बैठी महिला को देख वहां काफी भीड़ इकट्ठा हो गई. महिला के धरने पर बैठने की सूचना जब प्रशासनिक अमले तक पहुंची तो पुलिस मौके पर पहुंची और विवाहिता को वहां से उठवा कर महिला थाने में ले आई.

महिला के मुताबिक, जून 2016 में सुखपुरा थाना क्षेत्र के धरहरा गांव में उनकी शादी बृजेश यादव नाम के शख्स से हुई थी. शादी के बाद 2 बच्चे हुए. इसके बाद महिला के पति ने उन्हें अपने दोस्त के साथ ट्रेन से बेंगलुरु से बलिया भेजा, जहां यात्रा के दौरान बृजेश का दोस्त उसे मुगलसराय स्टेशन पर छोड़ कर भाग गया.

‘मुख्यमंत्री ने भी नहीं सुनी समस्या’

महिला ने बताया कि न्याय की फरियाद लेकर वह जिलाधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की चौखट पर गई. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गई. लेकिन वहां से भी न्याय नहीं मिला. उसका दो टूक सवाल यह है कि ‘अब मैं इन बच्चों को लेकर कहां जाऊं? इनका क्या कसूर है? महिला को पुलिस अफसरों ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया.
महिला ने बताया उसका पति पहले से ही शादीशुदा था. इस बात को छिपा कर उसने उसके साथ शादी की थी. उसके परिवार के लोग उसे मारपीट कर घर से भगा दिए. लाइन पुलिस चौकी इंचार्ज सूरज ने उसे समझाने का काफी प्रयास किया. लेकिन महिला किसी अधिकारी को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ी रही. इसकी जानकारी चौकी प्रभारी ने सीओ सिटी अरुण सिंह को दी. सीओ सिटी अरुण सिंह मौके पर पहुंच कर महिला को सिपाहियों की मदद से कोतवाली भिजवाया.

सुरक्षा की नीयत से बच्चों को जंजीरों से बाधा, राहगीरों ने बच्चों को दिया खाने का सामान

बच्चों संग धरने पर बैठी महिला काफी भयभीत है. उसे ससुराल वालों का डर सता रहा था. उसे भय है कि ससुराल वाले उसके दोनों बच्चों को लेकर कहीं भाग ना जाए. भय का आलम उसे इस हद तक पहुंचा दिया है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. बच्चों को खोने का डर उसे अमानवीय तरीका अपनाने को भी मजबूर कर दिया. उसने बच्चों को सुरक्षित रखने की नीयत से उन्हें जंजीरों में बांधकर रेलिंग में ताला लगा दिया. यह दृश्य देख वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए. जंजीरों में बैठे बच्चों को जब भूख सताने लगी, वे रोने चिल्लाने लगे. यह देख लोगों का कलेजा मुंह को आने लगा. वहां मौजूद लोगों ने दूध मंगा कर बच्चों को पिलाया. किसी ने बिस्कुट व अन्य खाद्य पदार्थ मंगा कर बच्चों की भूख मिटाई. बच्चों के मां के पास इतना भी धन नहीं था कि वह अपने बच्चों की भूख शांत कर सके.

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