विद्यालय प्रबंधक परिषद सीधे फरियाने की मुद्रा में

सरकार की ओर से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की उपेक्षा से समस्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक नाराज हैं. अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों का कहना है कि लगातार सरकार की उपेक्षा से माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता गिरती गई और इनकी माली हालत खराब होती गई है.

विद्यालयों की खस्ता मालीहालत के लिए सीधे सरकारी तंत्र को जिम्मेदार बताया
बलिया। सरकार की ओर से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की उपेक्षा से समस्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक नाराज हैं. अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों का कहना है कि लगातार सरकार की उपेक्षा से माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता गिरती गई और इनकी माली हालत खराब होती गई है.

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प्रबंधकों के अधिकारों पर लगातार कैंची चलाने से कर्माचारी निरंकुश हो गए
राज्य सरकार की ओर से प्रबंधकों के अधिकार पर लगातार कैंची चलाने से समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारी निरंकुश हो गए हैं. इसके कारण विद्यालयों में अनुशासन समाप्त हो गया है. शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारी मनमाने ढंग से विद्यालय आते हैं और चले जाते हैं. वेतन भुगतान के लिए एक-एक माह तक चाकडाउन आंदोलन करना और फिर आंदोलन अवधि का भी पूरा वेतन पा जाना, यह उनकी आदत में शामिल हो गया है.

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लगातार घटती जा रही है विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या
इससे अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की स्थिति बदतर हो गई है. इन विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या लगातार घटती जा रही है. इस परिस्थितियों से नाराज अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकों ने एक बैठक जवहीं माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक अवध बिहारी चौबे की अध्यक्षता में बैठक की.

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प्रबंधकों को अधिकार नहीं दे सकते, तो शिक्षक, सैलरी और मान्यता वापस ले लो
इस बैठक में निर्णय लिया गया यदि सरकार विद्यालयों में अनुशासन एवं शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रबंधकों को व्यापक अधिकार नहीं दे सकती है तो विद्यालय प्रबंधक सभा यह मांग करेगा कि सरकार अपनी मान्यता, अपने शिक्षक एवं सैलरी वापस ले. प्रबंधकों को विद्यालय वापस कर दें. इससे इन विद्यालयों में छात्र संख्या में भी वृद्धि हो जाएगी और शिक्षा की गुणवत्ता बहाल हो जाएगी. करीब तीन घंटे तक चले इस मंथन में विद्यालयों में किसी विषय की नई मान्यता न मिलना, सरप्लस दिखाकर के पदों की संख्या कम कर देना, विद्यालय के रिकॉर्ड को यह कहकर मान्यता न देना कि इसका ऑफिस रिकॉर्ड विभागीय कार्यालय में नहीं है. इन तमाम कारणों से इन विद्यालयों की स्थिति बिगड़ती चली गई.

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सीधे सपा सुप्रीमो से मिलकर रखेंगे अपनी बात
माध्यमिक विद्यालय प्रबंधक सभा को डॉ. चंद्रशेखर उपाध्याय, यतेन्द्र बहादुर सिंह, संजय कुमार सिंह दिनेश सिंह, डॉ बृजेश पाठक, अमरेंद्र शुक्ल, अनिल सिंह, तपेश्वर यादव, कैलाश सिंह, विनोद सिंह, गौतम तिवारी, नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया. यह भी निर्णय लिया गया कि 8 सितंबर को राज्य प्रतिनिधि प्रतिनिधि मंडल के साथ बलिया प्रबंधक सभा का एक प्रतिनिधि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलकर अपनी बात रखेगा. सभा का संचालन डीएवी इंटर कॉलेज बिल्थरारोड के प्रबंधक अनूप हेमकर ने किया.

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बच्चा पाठक और राजधारी संरक्षक मंडल में
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय प्रबंधक सभा बलिया की नई कार्यसमिति गठित कर दी गई है. ग्यारह सदस्यीय संरक्षक मंडल में पूर्व मंत्री बच्चा पाठक, पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, कमलेश कुमार सिंह, अवध बिहारी चौबे, चंद्रशेखर उपाध्याय, एमएलसी रवि शंकर सिंह पप्पू, तपेश्वर यादव, यतेंद्र बहादुर सिंह, केशव प्रसाद सिंह, नलिनेश श्रीवास्तव, जयवीर सिंह शामिल है.

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मुन्ना जी अध्यक्ष, अनूप हेमकर कार्यवाहक अध्यक्ष
संजय कुमार सिंह मुन्ना जी को अध्यक्ष निर्वाचित करते हुए अनूप कुमार हेमकर को कार्यवाहक अध्यक्ष चुना गया है. पांच उपाध्यक्ष में डॉ. बृकेश कुमार पाठक, अमरेंद्र कुमार शुक्ला, नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, रविंद्र राय, विनोद सिंह के नाम शामिल हैं.

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प्रमोद कुमार सिंह रेवती को महामंत्री बनाया गया

प्रमोद कुमार सिंह उर्फ़ मुन्ना जी रेवती को महामंत्री बनाया गया है. मझौली के गौतम तिवारी व बड़ागांव के अनिल कुमार सिंह को मंत्री तथा सुखपुरा इंटर कॉलेज के प्रबंधक दिनेश चंद्र सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावे कार्यकारिणी समिति में अभय सिंह, अरुण सिंह, राम सागर सिंह, अतुल कुमार सिंह, केशव प्रसाद सिंह, नरेंद्र प्रताप सिंह, बब्बन सिंह रघुवंशी, विनय कुमार उपाध्याय, कैलाश सिंह, विजयलक्ष्मी सिंह, फुलदेव पांडेय, प्रहलाद सिंह, महेश प्रताप तिवारी के नाम शामिल हैं.

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